Monday, March 01, 2010

दूर क्षितिज पर

देखा है प्यार को ..धुंधलाते हुए?
खालीपन का एहसास
उदासी मौनता शून्यता
वापस आने का कोई रास्ता नहीं
बस थोड़ी सी आशा
आँखों में
तुम दूर दिख रहे हो
क्षितिज पर
पास आ रहे हो, या दूर जा रहे हो ?
नतीजा मालूम है
कि तुमको मेरे लिए कोई नहीं ला सकता
क्या कोई आखरी मुलाक़ात भी होगी?

5 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari said...

बहुत गहरी भावाव्यक्ति.

निर्मला कपिला said...

बहुत गहरे भाव। धन्यवाद

अंतर्मन | Inner Voice said...

धन्यवाद मित्रो!वैसे यह मेरी एक अंग्रेज़ी में लिखी कविता का हिन्दी अनुवाद है.

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

अंतर्मन | Inner Voice said...

धन्यवाद संजय जी!