Thursday, September 03, 2009
Saturday, August 29, 2009
बंगलोर -5वाँ दिन
अभी कार नहीं होने की वजह से बहुत समस्या है|
कल सुबह मैं नाश्ते का सामान लेने चला तो बच्चों ने भी साथ चलने की ज़िद कर दी| 1 किलोमीटर की यात्रा में समझ नहीं आ रहा था कि आगे चलें या लौट जाएँ| रास्ते भर बच्चे 'डिज़्गस्टिंग' , 'दिस ईज़ वीर्ड' बोलते रहे| बच्चे 'डॅडी वाइ डोंट दे हैव साइड्वॉक' जैसे प्रश्न पूछते रहे जिसमें से किसी का उत्तर मेरे पास नहीं था| एक पढ़े-लिखे से दिखने वाले महानुभाव ने अपनी कार तो करीब करीब हमारे ऊपर ही रोक दी| इतना समझ में आ गया की पैदल चलने की कोशिश करना बहुत ख़तरनाक है|
दोपहर को शॉपिंग के लिए जाने का मन हुआ तो एक टैक्सी बुलाई| टैक्सी बुकिंग इतनी 'हाई टेक' है की क्या बताएँ| बुकिंग डीटेल्स और कैब डीटेल्स एस एम एस पर भेज दिए जाते हैं| वैसे यहाँ की टैक्सी भारत में सबसे महँगी सेवा है|
जेट लैग की वजह से हम लगभग हर दिन शाम को ज़ल्दी सो जाते हैं| आज शाम को बिजली भी नहीं थी तो सब ज़ल्दी ही सो गए| रात को भौंकते कुत्तों की आवाज़ों ने ज़ल्दी जगा दिया|
कल सुबह मैं नाश्ते का सामान लेने चला तो बच्चों ने भी साथ चलने की ज़िद कर दी| 1 किलोमीटर की यात्रा में समझ नहीं आ रहा था कि आगे चलें या लौट जाएँ| रास्ते भर बच्चे 'डिज़्गस्टिंग' , 'दिस ईज़ वीर्ड' बोलते रहे| बच्चे 'डॅडी वाइ डोंट दे हैव साइड्वॉक' जैसे प्रश्न पूछते रहे जिसमें से किसी का उत्तर मेरे पास नहीं था| एक पढ़े-लिखे से दिखने वाले महानुभाव ने अपनी कार तो करीब करीब हमारे ऊपर ही रोक दी| इतना समझ में आ गया की पैदल चलने की कोशिश करना बहुत ख़तरनाक है|
दोपहर को शॉपिंग के लिए जाने का मन हुआ तो एक टैक्सी बुलाई| टैक्सी बुकिंग इतनी 'हाई टेक' है की क्या बताएँ| बुकिंग डीटेल्स और कैब डीटेल्स एस एम एस पर भेज दिए जाते हैं| वैसे यहाँ की टैक्सी भारत में सबसे महँगी सेवा है|
जेट लैग की वजह से हम लगभग हर दिन शाम को ज़ल्दी सो जाते हैं| आज शाम को बिजली भी नहीं थी तो सब ज़ल्दी ही सो गए| रात को भौंकते कुत्तों की आवाज़ों ने ज़ल्दी जगा दिया|
Thursday, August 27, 2009
बेंगालुरू में चिट्ठाकारी?
बहुत दिनों से चिठ्ठाजगत से बाहर रहने के कारण यह नहीं पता की आजकल कौन से चिट्ठाकार कहाँ कहाँ हैं | क्या कोई चिट्ठाकार बंगलोरू में भी हैं? यदि हाँ तो कृपया टिप्पणी के द्वारा सूचित करें |
क्या दक्षिण भारत में भी कोई 'ब्लागर मीट' होती है?
क्या दक्षिण भारत में भी कोई 'ब्लागर मीट' होती है?
Wednesday, August 26, 2009
बंगलोर में 2 दिन
- 4 साल बाद बंगलोर वापस आया हूं| 2 दिन में कई आश्चर्यजनक बातें सामने आईं :
- महँगाई 2-2.5 गुना हो गई है|
- अमेरिकन कंपनियाँ 2 से चार गुना दाम में वही सामान भारत में बेच रही हैं|
- अमेरिकन ऑफीस स्टेशनरी स्टोर 'स्टेपल्स' की शाखाएँ भारत में देखकर आश्चर्य हुआ..लगता है अब 'बेस्ट बाई' और ओफिस डेपो' भी आएँगे|
- करोड़ो रूपए के घरों के बाहर निकलते ही सड़क के किनारे उतने ही कुत्ते और धूल गंदगी वग़ैरह दिखती है| ये सब कब सुधरेगा? चौराहो पर ट्रैफिक देखते ही बनता है |
आगे के समाचार फिर कभी |
- महँगाई 2-2.5 गुना हो गई है|
- अमेरिकन कंपनियाँ 2 से चार गुना दाम में वही सामान भारत में बेच रही हैं|
- अमेरिकन ऑफीस स्टेशनरी स्टोर 'स्टेपल्स' की शाखाएँ भारत में देखकर आश्चर्य हुआ..लगता है अब 'बेस्ट बाई' और ओफिस डेपो' भी आएँगे|
- करोड़ो रूपए के घरों के बाहर निकलते ही सड़क के किनारे उतने ही कुत्ते और धूल गंदगी वग़ैरह दिखती है| ये सब कब सुधरेगा? चौराहो पर ट्रैफिक देखते ही बनता है |
आगे के समाचार फिर कभी |
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