Sunday, February 05, 2006

एक शेर प्रेमियों के लिये

कुंवारे प्रेमियों की (दुर्)गति पर 'अनाम' लखनवी ने लिखा है:
"ऐ ख़ुदा, ऐ रहनुमा कुछ इस तरह तरक़ीब कर
आशिक़ी के ग़म में बैठा यूँ कोई क्वांरा न हो"

4 comments:

अनूप भार्गव said...

मेरे चिट्ठे पर 'टिप्पणी' छोडनें के लिये धन्यवाद. तुम्हारी ई-मेल नहीं मिल सकी इसलिये यहाँ लिख रहा हूँ । यदि समय मिले और चाहो तो यहाँ लिख सकते हो :
anoop_bhargava@yahoo.com

अनूप

Anonymous said...

वाह वाह

ये तो मेरे दिल से निकली हुयी आवाज है :-)

Dharni said...

अनूप जी..आजकल बहुत व्यस्त चल रहा हूं..किसी दिन मुलाक़ात का प्लान बनाते हैं..प्लेंस्बोरो तो कई बार आया गया हूं..
.एक दिन मेल करता हूं आपको।

आशीष..धन्यवाद...वैसे इस शेर की प्रेरणा आपके चिट्ठे की कहानी से ही मिली है :-) ...आगे लिखा के नहीं?

KT said...

Hello Aup,

don't know if this is the right way to approach you but I wanted to start a hindi blog of my own and cudn't get to start it. Could u plz help me. I tried searching on blogspot a lot but of no avail.

Changed the formatting to Hindi but how to display and write the blog in hindi. Thanks in advance if u choose to help me out.