Saturday, July 23, 2005

आज का दिन

ज़्यादतर समय भारत में अपने परिवार से वार्तालाप करने में बीता। दोपहर में वालमार्ट और सुपरमार्केट में बीता! करीब 5 घंटे ऐसे ही बीत गये। कार में लाइसेंस प्लेट लगानी है लेकिन पेंच है कि फिट ही नहीं हो रहा!
ड्राइविंग़ टेस्ट में फेल हो गया। सब कुछ ठीक ठाक था, सब्कुछ कर लिया...आखिर में एक '1 वे' पर दाहिने मुड़ गया! कहीं ऐसा कोई चिह्न नहीं था कि दाहिने मुड़्ना मना है। यह तो एक चाल थी। परीक्षक एक औरत थी जो पागल किस्म की थी। मुझे पहले ही लग रहा था कि यह मुझे पास नहीं करने वाली। खैर!
रात के पौने 2 बज गये...सो जाओ!

2 comments:

Anonymous said...

अनाम भैया मिर्ची सेठ का नमस्कार भी स्वीकार कीजिए। आप का लिखा पढ़कर प्रसन्नता हुई। और जहाँ तक लाईसेंस की बात है तो आप की ही बात को आगे बढ़ाते हुए "धीर तुम बढ़े चलो"

पंकज नरुला अम्बाले वाले
http://hindi.pnarula.com/haanbhai

Dharni said...

अच्छा तो आप हैं मिर्ची सेठ! धन्यवाद! आपके हिन्दी कार्यकलाप देखकर अत्यधिक प्रसन्नता हुई!