आजकल इतनी सारी हिन्दी और इतने लेखक देखकर लग रहा है कि जैसे अंग्रेज़ी से मुक्ति पाने का संग्राम छिड़ गया हो। वीर तुम डटे रहो!!
आजकल सारा समय अंतरजाल पर और बाकी लोगों को हिन्दी लिखना सिखाने में लगा रहता है। यह देखकर खुशी होती है कि इतने लोगों का मन है हिन्दी में बातें करने में! जहां तक हो सकता है मैं अंतरजाल पर हिन्दी में ही वार्तालाप करने लगा हूँ। अंग्रेज़ी जैसी अवैज्ञानिक भाषा की ज़रूरत किसे है आखिर!
No comments:
Post a Comment