Saturday, August 20, 2005

पहचान

अभी अभी एक मूवी देख कर आया। कॉमेडी थी
। बहुत दिनों बाद कोई मूवी देखी जिसमें लोग ठहाके लगा लगा के हंस रहे थे। मुझे आश्चर्य हुआ भारत पाकिस्तानी पात्रों को देखकर ..भले ही वे कुछ क्षणों के लिये चित्र-पटल पर उभरे थे..वो भी मज़ाकिया अन्दाज़ में। ऐसा लग रहा है कि भारतीयों को अब अमेरिका में कुछ पहचान मिलने लगी है। 5 साल पहले मैने गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड देखी थी बार्नस ऐंड नोबल्स में ..जिसमें बालिवुड सितारों के बारे में एक पूरा सेक्शन था- माधुरी, शाहरुख के बडे बडे चित्रों के साथ! और हाँ यह कोई स्पेशल एडीशन नहीं था। मैनें तुरंत एक प्रति खरीदी, और भारत ले जा कर लोगों को दिखाया।
यहां मेरे निवास स्थल के पास एक मूवी थियेटर है - रीगल सिनेमाज़ । यहाँ पर अंग्रेज़ी के साथ साथ भारतीय फिल्में भी लगती हैं - ऐसा नहीं कि अंग्रेज़ भी उन्हें देखते हैं, भारतीय दर्शक ही होते हैं हिन्दी फिल्मों के। अंग्रेज़ी के अनेक बडे बडे पोस्टर लगे रहते हैं यहाँ, पर कभी- कभार हिन्दी फिल्मों का भी एक पोस्टर दिख जाता है, जैसे अपनी पहचान बनाने के लिये प्रयासरत हो। यहाँ न्यू ज़र्सी में भारतीय रेस्टोरेंट्स में अंग्रेज़ों की संख्या देखकर मुझे सुखद आश्चर्य होता है।
मेरे एक सहकर्मी को भारत के बारे में इतनी जानकारी है कि यहाँ के भारतीयों को क्या होगी। आन्ध्र प्रदेश से उत्तर प्रदेश तक के बारे में जानता है (इन प्रदेशों के पूरे ना भी सही उच्चारित करता है) - यद्यपि वह कभी भारत नहीं गया। पिछले कुछ दिनों मे बहुत ही मज़ेदार घटनाएँ घटी हैं - कभी फुर्सत में बताऊँगा।

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