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घर
दुपहरी
बगिया
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पीपल
बरगद
गूलर
बेर
मकई
सरसों
कोंपल
ताल
तलैया
मेंढक
मछ्ली
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गुड्डा
गुड़िया
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टाटी
लढ़िया
हल
बैल
गाय
भैंस
दूध
घास
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सच्चा
बच्चा
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काकी
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चूल्हा
चक्की
लकड़ी
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सुबह
सूरज
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रेत
शाम
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गगरी
कुआँ
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दूल्हा
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नाई
कुम्हार
धोबी
बारिश
बूँदें
पानी
आम
धान
कोयल
साँप
सियार
बाँस
पगडंडी
सड़क
सपने
अपने
बहना
बिटिया
बचपन
तड़पन
आंसू
असहाय
मैं!
2 comments:
Wonderful. It is amazing style of writing and conveying something, it can be a great advertisement concept.
रवि जी, बहुत बहुत धन्यवाद! सच तो यह है कि मैने ये देख है कि जित्ने कम शब्दों में कुछ लिखा बोला जाए, उतना ही असरदार होता है। बस, मैने सोच अकि लोगों के सामने एक नया प्रयोग किया जाए, - बस एक शब्द प्रति पंक्ति! अब यह गद्य है कि पद्य, मालूम नहीं, लेकिन लगता है कि एक शब्द में न भी ताकत है बहुत कुछ कहने की। विज्ञापन की दुनिया में ये तरीक़ा कैसे प्रयोग कर सकते हैं, मुझे बतायें। वैसे मेरी ओर सी आपके नये प्रयास पर शुभकामनायें।
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