Saturday, July 30, 2005

अनाम

गाँव
घर
दुपहरी
बगिया
कबड्डी
पीपल
बरगद
गूलर
बेर
मकई
सरसों
कोंपल
ताल
तलैया
मेंढक
मछ्ली
बच्चे
गुड्डा
गुड़िया
माटी
टाटी
लढ़िया
हल
बैल
गाय
भैंस
दूध
घास
फूस
छप्पर
ट्रैक्टर
सच्चा
बच्चा
किसान
पानी
धान
गेंहूँ
काका
काकी
बाबा
दादी
चूल्हा
चक्की
लकड़ी
आग
सुबह
सूरज
खेत
रेत
शाम
बाल्टी
गगरी
कुआँ
रस्सी
नवयौवना
दरोगा
सरपंच
रेल
इंजन
धुआँ
स्टेशन
पुरवैया
मन्दिर
शादी
दूल्हा
बारात
नाच
बाजा
क्रीम
पाउडर
बिन्दिया
गहने
बनिया
धुनिया
नाई
कुम्हार
धोबी
बारिश
बूँदें
पानी
आम
धान
कोयल
साँप
सियार
बाँस
पगडंडी
सड़क
सपने
अपने
बहना
बिटिया
बचपन
तड़पन
आंसू
असहाय
मैं!

2 comments:

Anonymous said...

Wonderful. It is amazing style of writing and conveying something, it can be a great advertisement concept.

Dharni said...

रवि जी, बहुत बहुत धन्यवाद! सच तो यह है कि मैने ये देख है कि जित्ने कम शब्दों में कुछ लिखा बोला जाए, उतना ही असरदार होता है। बस, मैने सोच अकि लोगों के सामने एक नया प्रयोग किया जाए, - बस एक शब्द प्रति पंक्ति! अब यह गद्य है कि पद्य, मालूम नहीं, लेकिन लगता है कि एक शब्द में न भी ताकत है बहुत कुछ कहने की। विज्ञापन की दुनिया में ये तरीक़ा कैसे प्रयोग कर सकते हैं, मुझे बतायें। वैसे मेरी ओर सी आपके नये प्रयास पर शुभकामनायें।